
NAMO NAMO INDIA
Sunday, September 22, 2013
Tuesday, September 17, 2013
Monday, September 16, 2013
मस्जिद में खुदा, मंदिर में कहाँ भगवान मिलता है,
लड़ाई मे हिन्दू मुस्लिम की हिंदुस्तान जलता है….
.
बेबस मर गया वो भूख से, जो रिक्शा चलाता था,
लाश से उसकी, नेताओं का अब काम चलता है,
.
मजहब के नाम पर इन्हें, नफरत न सिखाना,
बचपन से जो चलना न सीखा, कहाँ वो फिर संभलता है,
.
मैं मेरे घर तू तेरे घर, भला फिर बात क्या होगी,
बिना कोशिश कहाँ, किसके लिए रस्ता निकलता है,
.
तोड़ दो तलवार उठी हैं ,जो मजहब के नाम पर,
एक साथ चलने से ही, इतिहास बदलता है,
.
ये बस्ती है इन्सानो की, तो यहाँ लाशें क्यों पड़ी हैं,
नज़ारा देख कर अब भी, नहीं क्यों लहू उबलता है,
.
हर तरफ अब उठता हैं, धुआँ अब मकानो से,
सरकारी चंद सिक्कों से, क्या कोई दिल बहलता है,
.
वोटों की गणित में हवा, आग को जो देती चली आई,
बदलने को ये अब सारी हुकूमत दिल मचलता है,
.
मस्जिद में खुदा, मंदिर में कहाँ भगवान मिलता है,
लड़ाई मे हिन्दू मुस्लिम की हिंदुस्तान जलता है….
लड़ाई मे हिन्दू मुस्लिम की हिंदुस्तान जलता है….
.
बेबस मर गया वो भूख से, जो रिक्शा चलाता था,
लाश से उसकी, नेताओं का अब काम चलता है,
.
मजहब के नाम पर इन्हें, नफरत न सिखाना,
बचपन से जो चलना न सीखा, कहाँ वो फिर संभलता है,
.
मैं मेरे घर तू तेरे घर, भला फिर बात क्या होगी,
बिना कोशिश कहाँ, किसके लिए रस्ता निकलता है,
.
तोड़ दो तलवार उठी हैं ,जो मजहब के नाम पर,
एक साथ चलने से ही, इतिहास बदलता है,
.
ये बस्ती है इन्सानो की, तो यहाँ लाशें क्यों पड़ी हैं,
नज़ारा देख कर अब भी, नहीं क्यों लहू उबलता है,
.
हर तरफ अब उठता हैं, धुआँ अब मकानो से,
सरकारी चंद सिक्कों से, क्या कोई दिल बहलता है,
.
वोटों की गणित में हवा, आग को जो देती चली आई,
बदलने को ये अब सारी हुकूमत दिल मचलता है,
.
मस्जिद में खुदा, मंदिर में कहाँ भगवान मिलता है,
लड़ाई मे हिन्दू मुस्लिम की हिंदुस्तान जलता है….
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